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मुश्किलों में भी मुस्कुराना है - रमेश 'कँवल'

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’52
मुश्किलों में भी मुस्कुराना है
ग़म से संवाद भूल जाना है
शुहरतों का गुलाल मुख पे लगा
जश्न लफ़्ज़ों का अब मनाना है
कोई अखबार हो कि टीवी हो
सुर्खियां बन के जगमगाना है
जल्द बिक जाने की तमन्ना में
दाम अपना घटाते जाना है
सीढ़ियों पर विकास की चढ़ कर
देश को विश्व गुरु बनाना है
रोज़ करते हैं देश की निंदा
लक्ष्य जिनका निजाम पाना है
धीर-गंभीर आवरण में 'कँवल'
हंस का आचरण दिखाना है
सृजन - 14 सितंबर,2025
जिउतिया
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन
2122,1212,22
पोस्टेड ऑन facebook 17-09-2025