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मुझे मरने में दुश्वारी नहीं है- रमेश 'कँवल'

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’72
मुझे मरने में दुश्वारी नहीं है
मगर यह ज़ीस्त कम प्यारी नहीं है
नहीं वो रूह को छू कर है गुज़रा
अदा उसकी मुझे प्यारी नहीं है
लिपटना, शर्म से फिर दूर होना
ये दिलबर की अदाकारी नहीं है
समझ कर फ़ैसले लेती है अपने
ये गुज़रे दौर की नारी नहीं है
यकीं कर लेना रहबर की सनक पर
कहीं से भी समझदारी नहीं है
मुझे ग़म दे गया तोहफ़े में ख़ुश हो
ख़ुशी है उसकी लाचारी नहीं है
मुझे महसूस होता है 'कँवल' यह
ग़ज़ल अच्छी है, मे'यारी नहीं है
सृजन - 16 नवंबर, 2025
मफाईलुन मफाईलुन फ़उलुन