#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’42
दिल के तहख़ाने से सुख का आसमाँ ले जाएगा
दे के अपना ग़म ख़ुशी का कारवाँ ले जाएगा
मेरी आँखों में बसेगा बन के दिलकश ख़्वाब जो
दिल के दरवाज़े से जज़्बों का बयां ले जाएगा
क्या ख़बर थी कासा-ए-दिल से लहू पीकर मेरे
ग़म रक़म कर अपना मेरी दास्ताँ ले जाएगा
आशना कर देगा हमको चाँद तारों से मगर
वो ज़मीने-इश्क़ की लज़्ज़त कहाँ ले जाएगा
मोहिनी सूरत बना साँसों में घुलकर रात-दिन
क़हक़शां के ख़्वाब दे कर दो जहाँ ले जाएगा
छोड़ देगा वो सियासत की करिश्मा साज़ियाँ
'साथ अपने ज़िंदगी की दास्ताँ ले जाएगा'
रहनुमाई मे चलो जो राहबर के तुम 'कँवल'
रफ़्ता रफ़्ता सू-ए-मंज़िल मेहरबाँ ले जाएगा
सृजन - 2 मार्च 2025
फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन
व्हाट्सप्प खगड़िया पर 17 मई,2025 को पोस्टेड