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जब मिलाता है मेरा हाथ दबाता क्यों है - रमेश 'कँवल'

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’32
जब मिलाता है मेरा हाथ दबाता क्यों है
रोज़ मिलने को मेरे पास तू आता क्यों है
जब गले लगता है होती है चमक आँखों में
जब बिछड़ता है तो फिर आँसू बहाता क्यों है
खूब हँसता है, लुभाता है मेरे तन-मन को
याद जब आती है उसकी तो रुलाता क्यों है
खिलखिलाते हुए चेहरे से इशारा करके
दूर वीराने में मिलने को बुलाता क्यों है
कोई तंज़ीम हो इल्जाम लगा कर नाहक
बोल तू देश की बुनियाद हिलाता क्यों है
बेसबब आग लगाने की हिमाकत कैसी
झूठ - अफ़वाह के सिक्कों को चलाता क्यों है
पहले टैरिफ़ की ही दहशत से डराना चाहा
अब 'कँवल' मोदी को रो-रो के मनाता क्यों है
सृजन 8 सितंबर,2025
फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन
2122 1122 1122 22
सदीनामा,कोलकाता के 22 सितंबर, 2025 (नवरात्रि -शैलपुत्री)
के अंक में प्रकाशित