#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’22
उलझनों में निखर रहा है कौन
हौसला दिल में भर रहा है कौन
डूब कर भी उभर रहा है कौन
दर्द सह कर सॅंवर रहा है कौन
राह में मस्तियों का आलम है
आप-सा हमसफ़र रहा है कौन
ज़िन्दगी की ज़रुरतें जो न हों
बोलिए दरबदर रहा है कौन
रक़्स है मस्त -मस्त पानी में
झील में अब उतर रहा है कौन
जब रिटायर हुआ तो हूँ घर में
यूं ही घर में मगर रहा है कौन
जब मुहब्बत बहुत है दिल में 'कँवल'
उनकी नफ़रत से डर रहा है कौन
सृजन : 17 फ़रवरी, 2025
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन / फ़ेलान