#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’21
उजाले से रिश्ता निभाना पड़ेगा
अंधेरे में दीपक जलाना पड़ेगा
मुसीबत में भी मुस्कुराना पड़ेगा
सुमन कंटकों में खिलाना पड़ेगा
भुलाया है जिसने हमें प्रेम पथ में
हमें भी उसे भूल जाना पड़ेगा
मनाज़िल हमारा करें खैर मक़दम
हमें रास्ता वह बनाना पड़ेगा
मिलन के लिए खुद मचल जाय प्रीतम
हमें रूप ऐसा सजाना पड़ेगा
अगर बन-सँवर कर बिखेरें वो ज़ुल्फ़ें
तो दर्पण को खुद पर लजाना पड़ेगा
जगत हो निरंतर 'कँवल' धर्म पथ पर
हमें आचरण कर दिखाना पड़ेगा
सृजन 24 मार्च,2025
फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन