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आप बतलाइए यह बात ज़माने भर से - रमेश 'कँवल'

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’13
आप बतलाइए यह बात ज़माने भर से
चैन मिलता है हमें आपके आने भर से
ज़ख़्म नासूर बना सब को दिखाने भर से
और चंगा हुआ मैं उनके हँसाने भर से
शंख बजने लगा मंदिर में हुईं ख़ुश देवी
आरती हो गई दीपों को जलाने भर से
प्लास्टिक कर रहा बर्बाद हमारा जीवन
मछलियाँ भी नहीं बचतीं इन्हें खाने भर से
जब मिलावट हो हर इक शय में निरोगी काया
किस तरह पायेंगे भरपूर कमाने भर से
झोपड़ी जल गई कितनों की हुए बेघर सब
ख़ुश हुए आप मगर आग लगाने भर से
रूठना यार की शोभा है ज़माने में 'कँवल'
अपना क्या मान ही जाते हैं मनाने भर से
सृजन - 28 जुलाई,2025
फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन /फ़ इ लुन
2122 1122 1122 22/112
जहानाबाद अरवल टाइम्स के 20 अगस्त,2025 के पृष्ठ 7 पर प्रकाशित