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आपके हुस्न के गीत गाऊंगा मैं

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’17
आपके हुस्न के गीत गाऊंगा मैं
धड़कनों की कहानी सुनाऊंगा मैं
वस्ल के गांव में ज़ुल्फ़ की छांव में
जिस्म की आंच पर गुनगुनाऊंगा मैं
अब ख़ुशी की करूंगा नहीं जुस्तजू
बस ग़मों से ही रिश्ता निभाऊंगा मैं
जैसे कांटों के घेरे में गुल ख़ुश रहे
दुख की बारिश में भी मुस्कुराऊंगा मैं
ज़ुल्म की सब हदें पार कर जो बना
राम मंदिर के दर्शन को जाऊंगा मैं
सभ्यता संस्कृति को सुरक्षित रखा
जग के इतिहास को यह बताऊंगा मैं
जो चले हैं सनातन मिटाने 'कॅंवल'
क्या है औक़ात उनकी दिखाऊंगा मैं
सृजन : 29-12-2023
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