Translation
#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’16
आपकी बातों में आ गए
आप मन को मिरे भा गए
धूप छत पर थिरकने लगी
आप ज्यों ही नज़र आ गए
लम्स उनका मयस्सर हुआ
रूह पर वो मेरी छा गए
दिल को मेले तमन्नाओं के
शाम होते ही भरमा गए
दिल को किसकी नज़र लग गई
सारे सुख मुझको ठुकरा गए
क्या तरक्क़ी सदी में हुई
युद्ध दुनिया के बतला गए
ज़िन्दगी मेरी थम सी गयी
सारे ग़म मुझसे टकरा गए
ऐसे आए 'कँवल' ज़ीस्त में
क़हर दिल पर मेरे ढा गए
सृजन 2 अप्रैल, 2024
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