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अब सफ़र में मज़ा आ रहा है - रमेश 'कँवल'

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’07
अब सफ़र में मज़ा आ रहा है
आगे दिलबर मेरा जा रहा है
राह में फूल भी ख़ार भी हैं
कोई गुलशन में समझा रहा है
आपरेशन में सिंदूर खुलकर
क़ह्र दुश्मन पे अब ढा रहा है
उनका दस्तूर है दोस्त ऐसा
दुश्मनों को बहुत भा रहा है
एक रहबर वतन में है ऐसा
राष्ट्र विकसित किए जा रहा है
हो गई उनको मुझसे मुहब्बत
शहर में हर कोई गा रहा है
दिल के दफ़्तर में हाज़िर हुए वो
सीसीटीवी ये दिखला रहा है
सृजन 7 जून,2025
फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ा