Back to List

अब्र ने ग़ुस्सा दिखाया देर तक - रमेश 'कँवल'

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’08
अब्र ने ग़ुस्सा दिखाया देर तक
बिजलियों ने क़ह्र ढाया देर तक
उनका ग़म, उनकी तमन्ना,रुत हसीं
उनकी यादों ने रुलाया देर तक
मैं दिलाता रह गया यादें बहुत
याद उसको मैं न आया देर तक
कर दिया बेहद ख़फ़ा तुहमत ने जब
फूल सा मुँह तमतमाया देर तक
दिल का दरवाज़ा मुकफ़्फ़ल हो गया
ज़हन में वो मुस्कुराया देर तक
है सनातन में सभी की आस्था
कुंभ ने डंका बजाया देर तक
मेरे पहलू में 'कॅंवल' उसने मुझे
मेरा ही क़िस्सा सुनाया देर तक
सृजन : 23 फ़रवरी, 2025
फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन